धरहरा के माताडीह में सहयोग शिविर का आयोजन, ग्रामीणों की समस्याओं का हुआ समाधान
धरहरा (मुंगेर)। बिहार सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर चलाए जा रहे सहयोग शिविर अभियान के तहत सोमवार को धरहरा प्रखंड के माताडीह पंचायत में शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को एक ही जगह पर सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और जानकारी उपलब्ध कराना था। शिविर का संयुक्त उद्घाटन एसडीओ कुमार अभिषेक और डीएसपी अर्जुन कुमार गुप्ता ने किया।
शिविर में विभिन्न विभागों से कुल 100 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया। प्राप्त आवेदनों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के 13, आयुष्मान भारत कार्ड के 11, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 8, भूमि सुधार विभाग के 9 और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के 4 आवेदन प्रमुख रूप से शामिल रहे।
जीविका काउंटर पर नहीं मिली जानकारी, दीदियों में नाराजगी
शिविर में सबसे ज्यादा निराशा जीविका से जुड़ी महिलाओं को झेलनी पड़ी। अपनी योजनाओं की जानकारी और 10 हजार रुपये की सहायता राशि से संबंधित समस्या लेकर पहुंची बेबी देवी, आरती देवी, कुमकुम देवी, सरोजनी देवी और कोमल देवी सहित दर्जनों महिलाओं को स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
महिलाओं ने बताया कि वे जीविका की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी लेने आई थीं, लेकिन शिविर में जीविका की प्रखंड परियोजना प्रबंधक (BPM) उपस्थित नहीं थीं। उनकी जगह पर पंचायत कोऑर्डिनेटर प्रभात कुमार मौजूद थे।
आरोप है कि जब महिलाओं ने राशि नहीं मिलने का कारण पूछा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला और उन्हें धरहरा स्थित जीविका कार्यालय में जाकर जानकारी लेने की बात कही गई। इस पर महिलाओं ने सवाल खड़ा किया कि जब शिविर का आयोजन ही पंचायत में जानकारी देने के लिए किया गया है, तो फिर कार्यालय जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। इससे शिविर के उद्देश्य पर ही सवाल उठता है।
कई अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर अंचल अधिकारी वीरेंद्र कुमार, पपिओ कुमार सुंदरम, सीडीपीओ अमृता रंजन, कृषि प्रखंड पदाधिकारी अशोक प्रियदर्शी, मुखिया संध्या कुमारी, मुखिया प्रतिनिधि रंजीत यादव, संतोष शाह सहित सभी विभागों के अधिकारी और कर्मी मौजूद थे। शिविर में आए ग्रामीणों ने इस तरह के आयोजन की सराहना की, साथ ही मांग की कि सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारी शिविर में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें ताकि लोगों को भटकना न पड़े।



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